Page 49 - E-Patrika 6th English Edition
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डा कया


                                            सबको लगता था
                                            डािकया िच  यां लाता था।

                                            मगर ऐसा नह  था
                                            डािकया लाता था जो
                                            महज िच  यां नह  थ  वो



                                            वो एहसास थ     े
                                            िजन्ह  उतारा गया था कागज पर

                                                              े
                                            कभी आंसुओं क सहार         े
                                            कभी खुशी कभी दद
                                                                         े
                                            कभी उदासी कभी गुस्स क रूप म
                                                                      े
                                            िकतनी िशद्दत स    े

                                            संभाल क रखी जाती थी वो िच  यां बरस  बरस
                                                      े
                                                           े
                                            घर क  सबस क मती जंग लगी उस संदक म
                                                                                        ू
                                                  े
                                            सबस अमीर था वो शख़्स
                                            अपन क ु नब म
                                                  े
                                                         े
                                                                    े
                                            िक िजसक नाम सबस अिधक
                                                       े
                                            िच  यां आई थ ।

                                                 े
                                            इतन एहसास  का समंदर
                                            समेट अपन अंदर
                                                         े
                                                  े
                                                 े
                                            कस चल पाता होगा
                                              ै
                                            वो िलफाफा
                                                          े
                                            एक जगह स दसरी जगह
                                                            ू
                                                         े
                                                               े
                                            एक शहर स दसर शहर
                                                            ू
                                                          े
                                            एक वतन स दसर वतन
                                                               े
                                                            ू
                                            इस डाक िवभाग न       े
                                            इक सदी स     े
                                            ऐस पह ंचाया है
                                                े
                                            इंसानी जज्बात  को

                                            एक जगह स दसरी जगह
                                                          े
                                                            ू
                                            जैस कोई नदी
                                                 े
                                            िकसी कतर को
                                                         े
                                            पह ंचाती है समंदर तक                                 Dhiraj

                                                           - धीरज  'अधीर '                  I-06 (SDP SA)









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