Page 48 - E-Patrika 6th Hindi Edition
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7. ान एव कौशल सग्रह प्रस्तुित
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एक फौजी क कहानी
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ना जान िकतनी रात जाग कर काटी उसन,
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ना जान िकतन सपन खुशी क छोड़ डाल, े
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ठंडी हवाओं, तज बा रश और तपती धूप म ,
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बस एक ही ख्वाब जो सीन स जोड़ डाल...
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घर क याद हर पल सताती रही,
मा क दआएँ हर कदम पर साथ िनभाती रही,
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पापा क सीख, बहन क मुस्कान,
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और देश क शान हौसल बढ़ाती रही...
वो जानता था, लौट भी सकता ह ँ, ना भी लौटूँ...
पर ितरंगे क शान कभी झकन ना दँगा,
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जब तक सास है, तब तक र ा क गा,
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य वादा खुद स िकया था, और िनभान िनकला था...
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फौजी िसफ वद नह पहनता,
वो अपन प रवार क उम्मीद , देश क इज्जत
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और हर भारतीय क न द अपन क ं ध पर उठाता है
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कभी छु ी िमलती है तो घर जाकर भी,
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वो चैन स नह सो पाता,
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क्य िक उस पता है, सीमा पर उसका कोई भाई,
इसी वक्त जाग रहा होगा...
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लोग कहत ह - फौजी क िजंदगी बड़ी आसान होती है,
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उन्ह क्या पता, हर मुस्कान क पीछ,
िकतना दद छुपा होता है,
हर सलाम क पीछ, िकतनी क ु बािनया होती ह ...
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म फौजी ह ँ... य कहकर वो सीना चौड़ा करता है,
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लिकन जब कोई पूछता है - थकत नह ?
तो बस मुस्क ु रा कर कहता है -
थकान स बड़ी है देश क मुस्कान...
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व ा क ु मार
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सी -21 (पी.ए. इडक्शन)
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