Page 14 - E-Patrika 6th Hindi Edition
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बड़ौदा म्यूिज़यम और िपक्चर गैलरी




















































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           बड़ौदा   ज़यम और िपक्चर गैलरी क   ापना 1894 म गायकवाड़ वश क सबसे
                                                                                                          े

      प्रगितशील  शासकों  म  स  एक,  महाराजा  सयाजीराव  गायकवाड़  ततीय  ने  क   थी ।
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        ज़यम क  इमारत को सुदर इडो-यरोिपयन आिकटक्चर शली म िडज़ाइन िकया गया


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      था और िपक्चर गलरी को बाद म 1921 म खोला गया था ।

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               यह   ज़यम ऐितहा सक चीज़ों, पुरानी मितयों, पाड लिपयों,  स ों, कपड़ों
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                                                                                                            ँ
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                                                      े
      और अतररा ीय कलाकितयों क अपन िवशाल कलेक्शन क  लए मशहूर है । यहा  मस्र
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      क  दुलभ प्राचीन चीज़  भी रखी ह ,  जनम एक  मस्र क  ममी भी शा मल है, जो यहा क                                  े
                                                                                                               ँ
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      सबस िदलचस्प आकषणों म स एक है । इस   ज़यम क  एक खास बात नेचरल िह  ी
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                                                                                                       ु
                                                       ं
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      सक्शन म रखा बबी  ेल का बड़ा ककाल है, जो हर उम्र क लोगों को अपनी ओर

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      खींचता है ।   ज़यम म ममल जानवरों क  शानदार मितया और जानवरों क सर  त
                                                                                                            ु
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                                                                                         े
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      रख गए नमन भी ह , जो वाइल्डलाइफ़ और नचरल साइस क कलक्शन को िदखाते ह  ।
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      य चीज़   ज़यम को न  सफ़ इितहास और कला का कद्र बनाती ह , ब   प्रकित और

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      िव ान क बार म सीखन क  लए एक ज़रूरी जगह भी बनाती ह  ।

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                  आज,  बड़ौदा    ज़यम  और  िपक्चर  गलरी  वड़ोदरा  क  एक  प्रमख  सा ितक
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      लडमाक क तौर पर मौजूद है, जो महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय क  दूरदश
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      सोच को दशाता है और भारत व दुिनया भर क  बहुमल्य धरोहर को सजोए हुए है ।

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